Sunday, August 29, 2010

जननी सुरक्षा में शिशु को भूल गई सरकार

प्रदेश में पिछले सालों से नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के अंर्तगत आंगनवाड़ी कार्यकताओं और एएनएम को स्तनपान को लेकर जागरुकता फैलाने का काम किया जा रहा है। फिर भी, संस्थागत प्रसव दर 78 प्रतिशत होने के बाद भी सही समय पर स्तनपान प्रारंभ कराने का प्रतिशत मात्र 43 प्रतिशत ही है.  ऐसे में स्तनपान जागरुकता को लेकर सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम पर एक बड़ा सवालिया निशान लग जाता है.
जननी सुरक्षा योजना का शायद जितना अच्छा आंकड़ा प्रदेश में है उतना शायद ही किसी दूसरे राज्य में हो। लेकिन, जननी को सुरक्षित रख, शिशु के पोषण की ओर ध्यान ही न देना आखिर कहां का न्याय है.  जननी सुरक्षा और डिस्ट्रिक्ट लेवल हाउस होल्ड एंड फेसेलिटी सर्वे के आंकड़ों को आमने-सामने रखें, तो यह बात साफ होती है कि सरकार को जननी की सुरक्षा का तो ध्यान है, लेकिन नवजात शिशु के भरण-पोषण और स्वास्थ्य की जरा भी चिंता नहीं है. 
मात्र 43 प्रतिशत बच्चों को ही मां का दूध

यदि डिस्ट्रिक्ट लेवल हाउस होल्ड एंड फेसेलिटी सर्वे-3 के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि प्रदेश में सालभर में पैदा हुए कुल बच्चों में से केवल 43 प्रतिशत को ही जन्म के एक घंटे के भीतर मां का दूध मिल पाता है.  जबकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक यदि जन्म के पहले एक घंटे के भीरत स्तनपान प्रारंभ करा दिया जाए, तो कुपोषण को 19 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है । संख्या पर जाएं तो वर्ष 2007-08 में लगभग 18 लाख बच्चों में से 10 लाख बच्चों के जन्म के पहले घंटे में मां का दूध नसीब ही नहीं हो पाया. 

इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी 78 प्रतिशत

सरकार द्वारा चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना का एक मात्र उद्देश्य मां व शिशु की रखा करना और प्रदेश में शिशु व मातृ मृत्युदर को घटना। योजना के अंतर्गत सरकार विभिन्न स्तरों पर काम कर संस्थागत प्रसव का प्रतिशत तो बढ़ा कर 78 प्रतिशत कर लिया, लेकिन बच्चे के स्वास्थ्य पर अभी भी किसी का ध्यान नहीं है । वर्ष 2007-08 में जहां संस्थागत प्रसव 71.05 प्रतिशत है, वहीं पहले घंटे में स्तनपान मात्र 43 प्रतिशत ही है । अब, सवाल यह उठता है कि जब प्रदेश में 70 प्रतिशत से अधिक प्रसव संस्थागत हो रहे हैं, तो प्रशिक्षण प्राप्त एएनएम कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर और नर्स होने के बावजूद वे स्तनपान को 70 प्रतिशत तक क्यों नहीं पहुंचा पा रहे।

आंकड़े ये कहते हैं-

शुरुआती 1 घंटे में स्तनपान - 43.1 प्रतिशत

0-5 माह में   सिर्फ स्तनपान - 51.5 प्रतिशत

6 माह तक  सिर्फ स्तनपान - 31.1 प्रतिशत

6-9 माह तक  स्तनपान व अल्पठोस आहार - 39.6 प्रतिशत

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