केस-1
पत्नी सुनीता (बदला हुआ नाम) ने उनके पति सुरेन्द्र (बदला हुआ नाम) पर आरोप लगाया कि वह मार-पीट करता है और दूसरी महिला के साथ उसका संबंध भी है । जब दोनों आरोपी और आवेदक दोनों पक्ष आयोग के सामने आए और अपनी-अपनी बातें रखीं, तो पाया गया कि कलह की मुख्य वजह पति-पत्नी का अहंकार है. इस अहंकार और कलह के परेशान हो दम्पत्ति की बड़ी बेटी ने आत्महत्या कर ली । आयोग ने दोनों को सझाहिश दी और उनके बाकी दो बच्चों की खारित सही ढंग से रहने को कहा ।
केस-2
पत्नी निकिता ने महिला आयोग में गुहार लगाई कि उनका पति रमेश शाराब पीकर मारता-पीटता है । पत्नी की गुहार पर पति-पत्नी को आयोग बुलाया गया और समझाने पर पति ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और मार-पीट न करने का वादा किया। सुलह के बावजूद पत्नी ने अपनी आत्म संतुष्टि के लिए सास-ससुर, चाचा सास-ससुर और ससुराल पक्ष के दूसरे लोगों पर दहेज प्रताडऩा का आरोप लगा दिया। जबकि, महिला ससुराल पक्ष से दूर अपने पति के साथ रहती है ।
केस-3
पति-पत्नी की शादी भोपाल में ही हुई थी, लेकिन बाद में दोनों दिल्ली में रहने लगे। पति-पत्नी दोनों ही महिला आयोग पहुंचे, पति को शिकायत थी कि पत्नि उनके मन-मुताबिक खाना नहीं बनाती हर काम अपनी मर्जी से करती है जबकि पत्नी का कहना था कि उनका पति उन्हें और घर के कामों को समय नहीं देता है। आयोग की समझाहिश पर बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए पति-पत्नी ने आपस में समझौता किया ।
ये सिर्फ तीन उदाहरण हैं, वास्तविक आकडे तो कुछ और ही कहते है. पारिवारिक कलह की वजहें भी अब समय के साथ बदलती जा रही हैं। महिला आयोग के पास आने वाली शिकायतों पर एक सरसरी नजर डालें तो समझ में आएगा कि पारिवारिक कलह की वजह पर पैसों की तंगी के बजाय पति-पत्नी के बीच अहंकार होता है । विशेषज्ञों की मानें तो करीब आयोग के पास आने वाले पारिवारिक कलह के केस में करीब 90 प्रतिशत का मूल बिंदु अहंकार या आत्म सम्मान ही होता है।
महिलाएं जागरुक पर पुरुष नहीं
दरअसल, समय के बदलाव के साथ महिलाओं में उनके अधिकारों के प्रति जागरु·ता आई है, जबकि पुरुष अभी भी महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाने को लेकर खुद की विचार धारा बदल नहीं पाए हैं। परिवार में पति-पत्नी की बहस होने का मुख्य कारण यही होता है कि यदि पत्नी किसी मुद्दे पर अपने विचार रखती है तो पति उसे एक्सपेट नहीं कर पाता. कई बार इस चीज को परिवार की बुजुर्ग महिलाएं भी मर्यादा तोडऩे की तरह मानती हैं।
10 प्रतिशत मुद्दे ही कोर्ट के लायक
आज के समय में आयोग के पास सबसे अधिक केस पारिवारिक कलह के आते हैं। जिसमें से करीब 90 प्रतिशत ऐसे होते हैं, जिनमें कलह की मुख्य वजह अहंकार या स्वाभिमान होता है । आयोग के पास आने वाले पारिवारिक कलह के केवल 10 प्रतिशत केस ही ऐसे होते हैं, जिसमें कलह की वजह वास्तव में ऐसी होती है, जिसको सुलझाने के लिए कोर्ट का सहारा लेना जरूरी होता है। पहले परिवार में विवाद की वजह पैसों की तंगी हुआ करती थी, लेकिन अब अहंकार गरीब और अमीर हर स्तर में परिवार में अशांति फैलाने का ही काम कर रहा है.
ताकि उज्जवल को बच्चों का भविष्य
पति-पत्नी के विचारों में विभिन्नता ही विवाद और फिर इसके बाद पारिवारिक कलह को जन्म देती है । यदि पति-पत्नी उनके परिवार और बच्चों के भविष्य के भविष्य को प्राथमि·ता दें तो अहम आड़े नहीं आएगा और कलह की वजह ही समाप्त हो जाएगी। अधि·तर मामलों में मेरी समझाहिश होती है कि बच्चों के उज्जवल भविष्य के खातिर पति-पत्नी दोनों आपस में समझौता कर लें ।
- उपमा राय, मेम्बर, मप्र राज्य महिला आयोग