Saturday, September 4, 2010

केवल 0.5 प्रतिशत को मिला जननी सुरक्षा योजना का फायदा

आखिर कितने प्रतिशत सुरक्षित है जननी...?  
 सरकार भले ही महिला उत्थान के लिए लाड़ली लक्ष्मी और जननी सुरक्षा योजनाएं शुरू करे, लेकिन महिलाओं के साथ छल और धोखाधड़ी का सिलसिला हमेशा जारी रहेगा। यह बात हाल ही हुए जिला स्तरीय निरीक्षण के परिणामों को देखकर आसानी से कही जा सकती है। इस निरीक्षण में सामाने आया कि जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत संस्थागत प्रसव पर तो सरकार ने पूरा जोर लगा दिया लेकिन योजना के अंतर्गत आने वाले दूसरे कामों की सरकार को सुध ही नहीं है।

वर्ष 2005 में महिलाओं को संस्थागत प्रसव और बेहतर स्वास्थ्य के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार द्वारा जननी सुरक्षा योजना व नेशनल मेटरनिटी बेनिफिट स्कीम(एनएमबीएस) की शुरुआत हुई। इन योजनाओं का एक अहम हिस्सा घरेलु प्रसव पर महिलाओं को सहायता राशि भी देना था। लेकिन, पिछले चार सालों में इस योजना का लाभ प्रदेश की केवल 1 प्रतिशत महिलाओं को ही मिल पाया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन
2005 में योजना की शुरुआत के बाद भी दो सालों में घरेलु प्रसव पर महिलाओं को सुविधा मुहैया न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवम्बर 2007 को योजना के पूर्ण क्रियान्वयन का आदेश दिया। आदेश के बाद भी वर्ष 2007-08 में जब महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिला। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2008 को एक बार फिर कैबिनेट सचिव को योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए फटकार लगाई। बावजूद, इसके वर्ष 2008-09 योजना के अंतर्गत लाभान्वित होने वाली महिलाओं का प्रतिशत 0.8 प्रतिशत घट गया।

केवल 0.5 प्रतिशत को मिला फायदा
नेशनल मेटरनिटी बेनिफिट स्कीम के अंतर्गत घरेलू प्रसव पर महिलाओं को उनकी उम्र और उनके बच्चो  की संख्या के आधार पर 500 रुपए देने की योजना है। योजना के अंतर्गत सहायाता राशि महिलाओं को 8 से 12 महीनों के भीतर प्राप्त हो जानी चाहिए। जबकि, अगर जिला स्तरीय स्वास्थ्य निरीक्षण-3 के आंकड़ों पर जाएं, तो प्रदेश में वर्ष 2005-06 के बीच किसी भी महिला को घरेलु प्रसव पर सहायता राशि प्राप्त नहीं हुई। जबकि, वर्ष 2006-07 में मात्र 0.4 प्रतिशत महिलाओं को योजना के अंतर्गत राशि उपलब्ध करावाई गई। सुप्रीम कोर्ट के सुधार संबंधी आदेश के बाद वर्ष 2007-08 में यह प्रतिशत बढ़ कर 1.8 पर पहुंचा। जो एक बार फिर वर्ष 2008-09 में 0.8 प्रतिशत घट गया। सीधे शब्दों में कहें, तो दोबारा आदेश के बाद भी लाभान्वित महिलाओं की संख्या मात्र एक प्रतिशत ही रही।

लाभ से दूर कई राज्य
2005 में शुरू हुई इस योजना के अंतर्गत पिछले चार सालों में घरेलु प्रसव प्र·रणों में लाभ पाने वाली महिलाओं का प्रतिशत 0.59 रहा। गुना, छिंदवाड़ा, मंदसौर, टीकमगढ़, छतरपुर, भिंड और मुरैना प्रदेश के कुछ ऐसे जिले हैं, जहां घरेलू प्रसव का प्रतिशत काफी ज्यादा है, जबकि ये राज्य योजनों के लाभों से बहुत दूर हैं। वहीं प्रदेश में विकास के मामले में सबसे आगे माने जाने वाले भोपाल और जबलपुर जिले में भी अभी तक किसी भी महिलए को घरेलु प्रसव प्रकरण पर सरकार द्वारा लाभ नहीं मिला। जबकि होशंगाबाद, हरदा, मुरैना, छतरपुर, टीकमगढ़, मंदसौर, जबलपुर और छिंदवाड़ा कुछ ऐसे जिले हैं, जहां पिछले चार सालों में किसी भी महिला को घरेलू प्रसव पर लाभ नहीं मिला।

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