गरीबों की बस्ती में अगर कार का विज्ञापन करें, तो लोगों के बीच चर्चा तो जरूर होगीे, लेकिन कोई गरीब इसे खरीदनेकी हिम्मत नहीं जुटा सकेगा। बस, ऐसा ही कुछ हुआ मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और इग्नु द्वारा शुरू किए गए एमटेक कोर्स के साथ। अखबारों में विज्ञापन के छपने के बाद परिषद के पास जानकारी मांगने के लिए करीब 250 लोगों ने फोन तो किया, लेकिन आखिरी तारीख के निकल जाने के बाद भी मात्र 15 अप्लीकेशन ही जमा हो पाए।
नहीं मिल रही एनओसी
केवल प्रोफेशनल्स के लिए इस कोर्स को डिजाइन किया गया था, जिसमें प्रोफेशनल्स को छह महीने की रेगुलर क्लास रूम स्टडी करना आवश्यक है। कोर्स को करने के लिए पूरे देश से 250 से अधिक लोगों ने अपना रुझान तो दिखाया, लेकिन जैसे ही छह महीने भोपाल आकर क्लासरूम स्टडी की बात आई, सभी पीछे हट गए। दरअसल, वे कंपनियां और सरकारी संस्थान जहां के प्रोफेशनल्स कोर्स करने के इच्छुक थे, ने काम प्रभावित होने के डर से छह महीने की रेगुलर क्लासेस के लिए उनके एम्पलॉइज को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) ही नहीं प्रदान की।
संभावना कि एक साल बाद शुरू हो कोर्स
इग्नु और एमपीसीएसटी की प्लानिंग के मुताबिक जुलाई से एमटेक कोर्स की शुरुआत की जानी थी, लेकिन इसके लिए अभी तक मात्र 15 अप्लीकेशन आने के कारण कोर्स की शुरुआत नहीं की जा सकी। अधिक एडमीशन के लिए सरकारी कर्मचारियों के लिए अप्लीकेशन सब्मिशन की तारीख भी आगे बढ़ा दी गई। सूत्रों के मुताबिक, चार स्पेशलाइजेशन (जियोस्पेशियल, बायोटेक, रूरल टेक्रोलॉजी और कंप्यूटेशनल) में एमटेक के लिए निर्धारित 72 सीटों की तुलना में यदि सम्मान जनक संख्या में अप्लीकेशन फॉर्म नहीं आए, तो यह संभावनाएं प्रबल हैं कि कोर्स को अगले साल से शुरू किया जाए।
केवल तीन ही सरकारी कर्मचारी
इस कोर्स में एक ओर जहां सरकारी कर्मचारियों को एडमिशन में प्राथमिकता देने की बात की गई थी, वहीं परिषद के पास आई 15 अप्लीकेशंस में सरकारी कर्मचारियों के आवेदनों की संख्या मात्र 3 हैै। एक खास चीज यह भी सामने आई कि परिषद के पास जमा हुई 12 अप्लीकेशंस में बिल्डर्स, प्राइवेट कॉलेज संचालक और प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी अधिक मात्रा में शामिल हैं। वहीं अगर चार स्पेशलाइजेश पेपर्स में लोगों के रुझान पर नजर डालें, तो सभी की पहली पसंद जियोस्पेशियल और दूसरी रूरल टेक्नोलॉजी हैं।
नहीं था पांच साल का अनुभव
चौंकाने वाली बात तो यह रही कि अधिकतर सरकारी और गैरसरकारी संस्थाओं के कोर्स के लिए इच्छुक कर्मचारी अर्हताओं को पूरा नहीं कर सके। दरअसल, कोर्स में एडमिशन के लिए प्रोफेशनल का बीटेक की डिग्री के बाद पांच साल जॉब एक्सपीरियंस होना जरूरी रखा गया था, लेकिन करीब 90 प्रतिशत प्रोफेशनल्स के पास बीटेक की डिग्री के बाद केवल एक या दो साल का ही एक्सपीरियंस पाया गया।
नहीं मिल रही एनओसी
केवल प्रोफेशनल्स के लिए इस कोर्स को डिजाइन किया गया था, जिसमें प्रोफेशनल्स को छह महीने की रेगुलर क्लास रूम स्टडी करना आवश्यक है। कोर्स को करने के लिए पूरे देश से 250 से अधिक लोगों ने अपना रुझान तो दिखाया, लेकिन जैसे ही छह महीने भोपाल आकर क्लासरूम स्टडी की बात आई, सभी पीछे हट गए। दरअसल, वे कंपनियां और सरकारी संस्थान जहां के प्रोफेशनल्स कोर्स करने के इच्छुक थे, ने काम प्रभावित होने के डर से छह महीने की रेगुलर क्लासेस के लिए उनके एम्पलॉइज को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) ही नहीं प्रदान की।
संभावना कि एक साल बाद शुरू हो कोर्स
इग्नु और एमपीसीएसटी की प्लानिंग के मुताबिक जुलाई से एमटेक कोर्स की शुरुआत की जानी थी, लेकिन इसके लिए अभी तक मात्र 15 अप्लीकेशन आने के कारण कोर्स की शुरुआत नहीं की जा सकी। अधिक एडमीशन के लिए सरकारी कर्मचारियों के लिए अप्लीकेशन सब्मिशन की तारीख भी आगे बढ़ा दी गई। सूत्रों के मुताबिक, चार स्पेशलाइजेशन (जियोस्पेशियल, बायोटेक, रूरल टेक्रोलॉजी और कंप्यूटेशनल) में एमटेक के लिए निर्धारित 72 सीटों की तुलना में यदि सम्मान जनक संख्या में अप्लीकेशन फॉर्म नहीं आए, तो यह संभावनाएं प्रबल हैं कि कोर्स को अगले साल से शुरू किया जाए।
केवल तीन ही सरकारी कर्मचारी
इस कोर्स में एक ओर जहां सरकारी कर्मचारियों को एडमिशन में प्राथमिकता देने की बात की गई थी, वहीं परिषद के पास आई 15 अप्लीकेशंस में सरकारी कर्मचारियों के आवेदनों की संख्या मात्र 3 हैै। एक खास चीज यह भी सामने आई कि परिषद के पास जमा हुई 12 अप्लीकेशंस में बिल्डर्स, प्राइवेट कॉलेज संचालक और प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी अधिक मात्रा में शामिल हैं। वहीं अगर चार स्पेशलाइजेश पेपर्स में लोगों के रुझान पर नजर डालें, तो सभी की पहली पसंद जियोस्पेशियल और दूसरी रूरल टेक्नोलॉजी हैं।
नहीं था पांच साल का अनुभव
चौंकाने वाली बात तो यह रही कि अधिकतर सरकारी और गैरसरकारी संस्थाओं के कोर्स के लिए इच्छुक कर्मचारी अर्हताओं को पूरा नहीं कर सके। दरअसल, कोर्स में एडमिशन के लिए प्रोफेशनल का बीटेक की डिग्री के बाद पांच साल जॉब एक्सपीरियंस होना जरूरी रखा गया था, लेकिन करीब 90 प्रतिशत प्रोफेशनल्स के पास बीटेक की डिग्री के बाद केवल एक या दो साल का ही एक्सपीरियंस पाया गया।
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