Tuesday, September 7, 2010

कहां जाएगा प्रदेश का खतरनाक कचरा ?

दूसरे राज्यों के खतरनाक कचरे के प्रबंधन को लेकर राज्य और केन्द्र सरकार एक ओर जहां खींच-तान में लगी है, वहीं हर साल एक लाख साठ हजार मेट्रिक टन से भी अधिक खतरनाक कचरा पैदा कर रहे मध्यप्रदेश के वैज्ञानिक और अधिकारियों को इसके प्रबंधन की चिंता ही नहीं है। हैजारडस वेस्ट मैनेजमेंट के लिए तीन साइट्स को बनाने के सुप्रीम कोर्ट को दिए गए आश्वासन के 7 साल बाद भी अभी तक प्रदेश में एक ही ऐसी साइट तैयार हो पाई, जहां खतरनाक कचरे का प्रबंधन किया जाता है ।

हर साल लाखों टन खतरनाक कचरा
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से मिले आंकड़ों के मुताबिक, हर साल प्रदेश से करीब 1 लाख 67 हजार 889 मेट्रिक टन कचरा नि·लता है। जिसमें 34,943 टन डिस्पोज करने योग्य, करीब 1 लाख 27 हजार मेट्रिक टन कचरा रिसाइकल करने योग्य होता है, जबकि 5037 मेट्रिक टन कचरे को केवल इनसीनिरेटर में ही डिस्पोज किया जा सकता है । अगर वास्तविक स्थिति की बात करें तो खतरनाक कचरा प्रबंधन के लिए एक मात्र साइट पीथमपुर में भी इनसीनिरेटर पूरी तरह से चालू हालत में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, साइट के डवलप हो जाने के बाद 2006 में शुरू हो जाने वाल इनसीनिरेटर की विर्किंग भी मई महीने में ही शुरू हो पाई है।

सिर्फ एक ही कंपनी को ठेका
मप्र प्रदेश में हजारों की संख्या में औद्योगिक कंपनियां चलाई जा रही हैं, इसके बावजूद पिछले 10 सालों से प्रदेश में सिर्फ एक ही कंपनी (रैमकी इनविरो इंजीनियरिंग लिमिटेड) को खतरनाक कचरा प्रबंधन का चार्ज प्रदेश सरकार द्वारा दिया गया है।

भोपाल के पास भी चिन्हित थी साइट
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक मप्र में 3 स्थानों भोपाल, जबलपुर और पीथमपुर को खतरनाक कचरा प्रबंधन के लिए साइट्स तैयार करने के लिए चिन्हित किया गया था, जबकि अभी तक सिर्फ एक ही साइट (पीथमपुर) को डेवलप किया गया । सवाल यह उठता है कि करीब 7 साल पहले चिन्हित तीन साइट्स में से पीथमपुर को ही डेवलप करने के लिए क्यों चुना गया, जबकि गैस त्रासदी के बाद यूका से निकलने वाले खतरनाक कचरे का प्रबंधन उस समय में भी चिंता का गंभीर विषय था। वहीं अब सरकार द्वारा यूका के खतरनाक कचरे के प्रबंधन के लिए करीब 300 करोड़ रुपए की राशि सैंक्शन की है। यह कचरा प्रबंधन साइट अगर भोपाल में होती तो जाहिर सी बात है कि प्रबंधन में इतनी ज्यादा धनराशि खर्च नहीं करनी पड़ती।

भविष्य की प्लानिंग में 9 साइट्स और
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक ओर जहां एक ही साइट को डेवलप कर लेने के बाद खतरनाक कचरा प्रबंधन की समस्या को लेकर संतुष्ट है, वहीं सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने रिपोर्ट में साफ किया है कि प्रदेश में औद्योगिक विकास को देखते हुए आगामी सालों में नौ अन्य स्थानों सतना, छिंदवाड़ा, खरगौन, भिंड, गुना, बैतूल, नरसिंगपुर, झाबुआ और देवास को भी खतरनाक कचरा प्रबंधन साइट बनाने के लिए चिन्हित किया है।

एक ही साइट से चल जाएगा काम
आज से छह साल पहले तीन साइट्स में से एक पर काम शुरू किया गया था, उस समय परिस्थितियों के मुताबिक पीथमपुर बेस्ट साइट लगी होगी। फिलहाल, प्रदेश का पूरा खतरनाक कचरा पिछले 4 सालों से पीथमपुर साइट में एब्जॉर्ब हो रहा है, अभी किसी दूसरी साइट की जरूरत नहीं है। अगर होगी, तो बाकी चिन्हित साइट्स का विकास किया जाएगा ।
    डॉ. आपले, वरिष्ठ वैज्ञानिक, खतरनाक कचरा प्रबंधन, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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